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हमारे बारे मे

बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन परियोजना बिहार सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन हेतु उठाया गया एक महत्त्वाकांक्षी पहल है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय विषेषकर गरीब तबके के लोगों को उनके जीविकोपार्जन के लिए समुचित अवसर उपलब्ध कराना है। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति द्वारा संचालित ‘‘जीविका’’ परियोजना को राष्टीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत बिहार के 38 जिलों के कुल 534 प्रखंडों में विभिन्न चरणों में संचालित किया जाना है। दस साल की अवधि के दौरान राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 1.25 करोड़ लक्षित ग्रामीण परिवारों को लगभग 10 लाख स्वयं सहायता समूहों, 65000 ग्राम संगठनों एवं 1600 संकुल स्तरीय महासंघों में संगठित किया जाना है।

बी0आर0एल0पी0एस0(बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति) के द्वारा ग्रामीण जीविकोपार्जन के विकल्प को विकसित कर ग्रामीण गरीबों और महिलाओं के हितार्थ ग्रामीण जीविकोपार्जन के विकल्प और सामाजिक तथा आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कार्यन्वित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। बी0आर0एल0पी0एस0 के साथ कार्य करने वाले समुदाय के साथ निम्न चार विषयों या योजनाओं के द्वारा मध्यस्थता करेगाः संस्थान और क्षमता निर्माण, सामाजिक विकास, लघुस्तरीय वित और जीविकोपार्जन।

बीआरएलपी विकास के क्षेत्र में अपनी एक अमिट पहचान बनार्इ है। अपनी कार्यशैली एवं अद्वितीय परिणामों के कारण सरकारी संस्थाओं, गैर-सरकारी संस्थाओं व अन्य हितधारकों द्वारा मान्यता अर्जित की है। यह अपने साथियों के लिए पेशेवर और चुनौतीपूर्ण काम का माहौल प्रदान करती है। यह अनुभवी विकास कार्यकर्ताओं और महत्वाकांक्षी नवयुवकों को ग्रामीण भारत के विकास के लिए एक-दूसरे से जुड़ने के लिए सुअवसर प्रदान करती है।

बी0आर0एल0पी0एस0(बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति) बिहार के सभी प्रखंडों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) को क्रियान्वित करने के लिए क्रार्यान्वन एजेंसी है तथा इस कार्य के लिए विभिन्न स्तरों पर (ग्राम/पंचायत/प्रखंड/जिला/ राज्य) विकास कार्यकर्ताओं को तलाश रही है।

जनसाधारण के साथ कार्य

बीआरएलपी के विकास कार्यकर्ता उसी समुदाय के लोगों के बीच रहते और काम करते हैं जिसमें वे कार्यरत होते हैं। इसका अर्थ है कि हमारे सहयोगी गाँवों में रहते हैं और उनके साथ पारस्परिक व्यवहार करके समुदायों में कार्यरत होते हैं। गाँवों में विद्यमान कार्य परिस्थितियाँ शहरी जीवन से बहुत भिन्न होती हैं। कार्यालयीन या डेस्क पर बैठे-बैठे करने वाले कार्यों के इच्छुक आवेदनकर्ताओं को आवेदन न देने की क़ड़ी हिदायत दी जाती है।

 
 
 
 

प्रशंसापत्र

 
 
 
 
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